बदरीनाथ-केदारनाथ धाम में वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं को मिलेगी प्राथमिक दर्शन सुविधा

देहरादून : श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने चारधाम यात्रा के दौरान श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ धाम पहुंचने वाले वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। समिति ने दोनों धामों में बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को प्राथमिकता के आधार पर दर्शन कराने की व्यवस्था लागू कर दी है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ (पीसीएस) ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। मंदिर समिति के अनुसार यह व्यवस्था श्रद्धालुओं के सम्मान, सुरक्षा और सुगम दर्शन को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि दोनों धामों में आने वाले वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं को प्राथमिकता के आधार पर दर्शन कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मंदिर समिति द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि बुजुर्ग और दिव्यांग भक्तों को बिना परेशानी सुरक्षित एवं सहज दर्शन का लाभ मिल सके।

मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि निर्धारित मानक प्रचालन विधि (एसओपी) के तहत प्राथमिक दर्शन व्यवस्था लागू की गई है। इसके अंतर्गत श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ धाम में 50-50 श्रद्धालुओं के चार स्लॉट बनाए गए हैं। प्रत्येक स्लॉट 15 मिनट का होगा, जिससे कुल एक घंटे तक विशेष दर्शन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने बताया कि निर्धारित समयावधि में केवल वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं को ही दर्शन की अनुमति होगी। दर्शन के लिए सुबह 8 बजे से 8:15 बजे तक, सुबह 10 बजे से 10:15 बजे तक तथा शाम 3 बजे से 3:15 बजे तक और शाम 4:45 बजे से 5 बजे तक विशेष समय निर्धारित किया गया है। मंदिर समिति के अनुसार दोनों धामों में तैनात बीकेटीसी कर्मी श्रद्धालुओं की सहायता करेंगे। इसके अलावा प्रशासन, पुलिस, होमगार्ड और हेल्प डेस्क से भी समन्वय स्थापित किया गया है, ताकि व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।

बीकेटीसी की एसओपी के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं और वास्तविक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों को प्राथमिक दर्शन सुविधा दी जाएगी। इसके लिए श्रद्धालुओं को आधार कार्ड एवं मंदिर समिति के काउंटर पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। दिव्यांग श्रद्धालुओं की स्थिति का सत्यापन करने के बाद ही उन्हें सुविधा का लाभ दिया जाएगा। मंदिर समिति के इस निर्णय का श्रद्धालुओं ने स्वागत करते हुए इसे मानवीय और सराहनीय पहल बताया है।

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