महाराष्ट्र में फिर बड़ा सियासी भूचाल : शिवसेना (UBT) में बड़ी बगावत की आहट, शिंदे गुट के संपर्क में 7 सांसद!

मुंबई/नई दिल्ली : हाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची रार के बीच अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) पर टूटने का खतरा मंडरा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 से 7 सांसद पाला बदलकर सत्ताधारी शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने के इच्छुक हैं और उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डेरा डाल दिया है। इस बीच, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भी मंगलवार देर रात अचानक दिल्ली रवाना होने से इन अटकलों को और हवा मिल गई है। दूसरी ओर, इस संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने कड़ा रुख अपनाया है और कहा है कि “जो पार्टी छोड़कर जाना चाहते हैं, वे खुशी-खुशी जा सकते हैं।”

‘आदित्य ठाकरे का बढ़ता कद’ बनी बगावत की वजह!

शिंदे खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि 6 से 7 सांसद पाला बदलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस असंतोष की मुख्य वजह पार्टी के भीतर आदित्य ठाकरे की भूमिका और उनका कद बढ़ाया जाना है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी 19 जून को अविभाजित शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर पार्टी आदित्य ठाकरे को लेकर एक बड़ी घोषणा करने वाली थी। नाराज सांसदों को संगठन में आदित्य का और अधिक वरिष्ठ होना स्वीकार्य नहीं है।

संजय राउत का सनसनीखेज आरोप

पार्टी में संभावित टूट को रोकने के लिए शिवसेना (UBT) के रणनीतिकार और सांसद संजय राउत अचानक दिल्ली पहुंच गए हैं। मंगलवार देर रात उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद सनसनीखेज पोस्ट कर राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी। राउत ने लिखा कि “अपना सपना मनी… मनी। ऐसी सूचना है कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए आज रात 15 करोड़ का एडवांस दिया जाएगा। यह चौंकाने वाला और घृणित है।” हालांकि, बुधवार को मीडिया से बात करते हुए राउत ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी की और कहा कि बाजार में गलत तस्वीर पेश की जा रही है, सभी सांसद उद्धव जी के साथ मजबूती से खड़े हैं।

अध्यक्ष ओम बिरला के द्वार पहुंचे अरविंद सावंत

इस संभावित टूट को कानूनी रूप से विफल करने के लिए शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने देर रात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र भेजा है।

पत्र के मुख्य बिंदु:

  • लोकसभा में शिवसेना (उबाठा) अपने विधिवत अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक (व्हिप) के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र मान्यता प्राप्त पार्टी है।

  • यदि कोई अलग हुआ समूह या कथित गुट पार्टी पर दावा ठोकता है, तो उसे कोई अलग मान्यता, दर्जा या विशेषाधिकार न दिया जाए।

  • ऐसा कोई भी फैसला लेने से पहले लोकसभा अध्यक्ष मूल पार्टी (UBT) को अपना पक्ष रखने का अवसर दें।

  • पार्टी दल-बदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) के तहत उपलब्ध सभी कानूनी और संवैधानिक उपायों का सहारा लेने का अधिकार सुरक्षित रखती है।

बैठक से गायब रहे थे 5 सांसद

इस बगावत की पटकथा रविवार को ही लिख गई थी, जब उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक में 9 में से केवल 4 सांसद (अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल) ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे। हालांकि, तब दावा किया गया था कि बाकी 5 सांसदों ने ऑनलाइन या फोन के जरिए शिरकत की थी।

अब स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उद्धव गुट ने बुधवार को दिल्ली में अपने संसदीय दल की एक आपात बैठक बुलाई है। नाराज और संपर्क से बाहर चल रहे सांसदों के फोन अचानक बंद आ रहे हैं, जिन्हें मनाने और उनसे तालमेल बिठाने की कमान खुद उद्धव ठाकरे और उनके शीर्ष नेताओं ने संभाल ली है।

सत्तारूढ़ खेमे ने दिए स्वागत के संकेत

सत्तारूढ़ शिवसेना के नेता प्रताप सरनाईक ने भी इस मामले पर बयान देकर आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि उद्धव गुट के असंतुष्ट सांसद उनके साथ आना चाहते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा और उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के दावों के बीच अब देखना यह होगा कि क्या उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को दोबारा बिखरने से बचा पाते हैं या महाराष्ट्र में 2022 का इतिहास एक बार फिर दोहराया जाएगा।

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