रूद्रनाथ मंदिर में उमड़ा तीर्थयात्रियों का हुजुम

गोपेश्वर (चमोली)।  उच्च हिमालय में चतुर्थ केदार के रूप में विख्यात रूद्रनाथ मंदिर में तीर्थयात्रियों का जमावडा लगता जा रहा है। इसके चलते तीर्थयात्रियों का संभालना मुश्किल सा होता दिखाई दे रहा है।

दरअसल चमोली जिले में स्थित रूद्रनाथ मंदिर के लिए जिला मुख्यालय गोपेश्वर से कुछ दूर सगर गांव से 18 किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर तीर्थयात्रियों को भगवान के दर्शनों का पुण्य लाभ अर्जित होता है। इस बार तो 18 मई को कपाट खुलने के पश्चात तीर्थयात्री रूद्रनाथ मंदिर की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। यह स्थिति बता रही है कि अब तीर्थयात्रियों का संभालना मुश्किल सा हो रहा है। रूद्रनाथ मार्ग पर जगह-जगह रहने और खाने के लिए टेंटों की व्यवस्था तो की गई है किंतु मौजूदा दौर में इसे अपर्याप्त माना जा रहा है। तीर्थयात्रियों को संभालना मुश्किल सा हो रहा है। सीमित संख्या में लगाए गए टेंटों के चलते श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो पा रही है। इस मामले में स्थानीय लोगों ने भी अब तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए रहने खाने की व्यवस्था कर दी है। गंगोलगांव, सगर तथा ग्वाड गांव में रात्रि प्रवास के लिए जिस तरह तीर्थयात्रियों का जमावडा दिखने को मिल रहा है। उसके चलते माना जा रहा है कि इस बार रूद्रनाथ की यात्रा शुरूआती दौर में ही चरम पर पहुंच गई है। यात्रा मार्ग पर अब भी व्यवस्थाओं को बेहतर करने की दरकार बनी है। वैसे इको समितियों के माध्यम से वन विभाग ने टेंट तो लगाए हैं किंतु इन्हें तीर्थयात्रियों के हिसाब से काफी कम माना जा रहा है। इसी तरह के हालात रूद्रनाथ मंदिर परिसर में भी बने हैं।

वैसे 2020 के कोरोना काल में तमाम प्रतिबंधों के चलते उत्तराखंड के तमाम जिलों के तीर्थयात्री प्रशासन को चकमा देकर रूद्रनाथ यात्रा पर निकल पड़े थे। इसलिए रूद्रनाथ यात्रा के लिए कोरोना काल याद रखा जाएगा। इस बार भी तीर्थयात्रियों का शुरूआती दौर में ही रेला उमड़ने लगा है। रूद्रनाथ की कठिन यात्रा के लिहाज से तीर्थयात्रियों की भारी आमद भविष्य के लिए शुभ संकेत मानी जा रही है। अब भी सुविधाओं को बेहतर करने की जरूरत है। संेचुरी एरिया का बहाना बना कर तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित करना किसी के गले नहीं उतर रहा है। हालांकि केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, हेमकुंड साहिब आदि तीर्थ सेंचुरी एरिया में ही हैं। इन धामों में सेंचुरी का कोई प्रतिबंध नहीं है। रूद्रनाथ में इसी तरह के प्रतिबंध सवाल खड़े कर रहे हैं।

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