बीमार एंबुलेंस, भगवान भरोसे मरीज, हाइवे किनारे दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था

कर्णप्रयाग (चमोली)। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कालेश्वर के पास पिछले दो दिनों से खराब हालत में खड़ी 108 सेवा की दो एंबुलेंस उन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। जिन वाहनों का काम संकट की घड़ी में जिंदगी बचाना है, वे खुद सड़क किनारे बेबस खड़े हैं और मरीज भगवान भरोसे हैं।

कर्णप्रयाग और नौटी क्षेत्र के हजारों लोगों की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं इन एंबुलेंसों पर निर्भर हैं, लेकिन विडंबना यह है कि नौटी जैसे बड़े क्षेत्र के लिए केवल एक एंबुलेंस उपलब्ध है और वह भी अक्सर खराब रहती है। ऐसे में यदि किसी मरीज की जान पर बन आए तो उसे अस्पताल से पहले व्यवस्था की लापरवाही से जूझना पड़ता है।

चमोली जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 108 सेवा की 22 एंबुलेंस संचालित किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी कह रही है। कालेश्वर के पास खड़ी खराब एंबुलेंसें इस बात की गवाही दे रही हैं कि रखरखाव की अनदेखी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

नौटी निवासी जगमोहन सिंह का कहना है कि इतने बड़े क्षेत्र के लिए एकमात्र एंबुलेंस होना ही पर्याप्त नहीं है, ऊपर से उसका बार-बार खराब होना लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है। यशपाल खत्री ने आरोप लगाया कि विभाग नियमित रखरखाव नहीं करा रहा, जिसके कारण एंबुलेंस आए दिन खराब होती हैं और कई-कई दिनों तक सड़क किनारे खड़ी रहती हैं।

कर्णप्रयाग निवासी लक्ष्मी प्रसाद ने बताया कि उप जिला अस्पताल पहले ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। गंभीर मरीजों को उच्च केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है, लेकिन एंबुलेंस खराब होने पर परिजनों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह दोहरी मार साबित हो रही है।

प्रमोद, गरिमा, शकुंतला, तनुजा, जयंती, मनोज और अजय सहित स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से एंबुलेंसों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने, पर्याप्त संख्या में वाहन उपलब्ध कराने और अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो किसी दिन यह लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।

 

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