उत्तराखंड : गंभीर बीमारी के आधार पर तबादलों को मंजूरी, अनुरोध वाले शिक्षकों को करना होगा इंतजार

देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा विभाग के शिक्षकों के तबादलों को लेकर लंबे समय से चल रही प्रतीक्षा के बीच शासन ने गंभीर बीमारी और विशेष पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर प्रस्तावित तबादलों को मंजूरी दे दी है। हालांकि अनुरोध के आधार पर दुर्गम से दुर्गम तथा सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में किए जाने वाले तबादलों पर अभी निर्णय नहीं हो पाया है। शासन ने इस संबंध में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से परामर्श के लिए प्रस्ताव भेजा है, जिसके बाद अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।

शिक्षा विभाग में तबादला एक्ट के तहत शिक्षक पूरे वर्ष दुर्गम क्षेत्रों से सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरण की उम्मीद लगाए रहते हैं। पिछले वर्ष भी तबादला एक्ट के तहत अपेक्षित संख्या में तबादले नहीं हो सके थे। वहीं चालू सत्र 2026-27 में भी तबादलों की प्रक्रिया काफी देरी से आगे बढ़ी है। स्थिति यह है कि स्थानांतरण के लिए निर्धारित समयसीमा समाप्त होने में अब एक सप्ताह से भी कम समय बचा है, जबकि अधिकांश मामलों में प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम की धारा-27 के तहत प्राप्त प्रस्तावों पर नियुक्ति प्राधिकारी स्तर पर गठित स्थानांतरण समितियां कार्रवाई करेंगी। इनमें चार प्रधानाचार्यों, 91 प्रवक्ताओं, 97 सहायक अध्यापक एलटी (गढ़वाल मंडल) तथा 73 सहायक अध्यापक एलटी (कुमाऊं मंडल) के तबादले के प्रस्ताव शामिल हैं।

इन प्रस्तावों में स्वयं शिक्षक, पति या पत्नी की गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, गंभीर रूप से बीमार बच्चों, विधवा, विधुर, तलाकशुदा, परित्यक्ता, आपदा प्रभावित परिवारों तथा माता-पिता की गंभीर बीमारी जैसे मानवीय आधारों को शामिल किया गया है। शासन ने इन मामलों में स्थानांतरण समितियों को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर अनुरोध के आधार पर दुर्गम से दुर्गम और सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में स्थानांतरण की मांग करने वाले शिक्षकों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। इन मामलों में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की राय लेने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

30 जून तक तबादले पूरे होना मुश्किल

तबादला एक्ट के तहत विभागीय तबादलों की मूल समयसीमा 10 जून निर्धारित थी, लेकिन विभिन्न विभागों में प्रक्रिया पूरी न होने के कारण कार्मिक विभाग ने इसे बढ़ाकर 30 जून कर दिया था। बावजूद इसके शिक्षा विभाग में अब तक स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन को समयसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है। यदि अतिरिक्त समय मिलता है, तभी शेष तबादलों को पूरा किया जा सकेगा।

निर्वाचन आयोग की अनुमति भी जरूरी

तबादला प्रक्रिया के सामने एक और प्रशासनिक चुनौती मौजूद है। राज्य में निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस कार्य से जुड़े किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का स्थानांतरण आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग ने अब तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी से तबादलों के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं की है। ऐसे में स्वीकृत प्रस्तावों के क्रियान्वयन में भी तकनीकी अड़चनें आ सकती हैं।

नए आवेदन भी होंगे आमंत्रित

शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने बताया कि जिन प्रस्तावों को स्थानांतरण समितियों के समक्ष भेजा गया है, वे अधिकांशतः पिछले वर्ष प्राप्त आवेदन हैं। इनके साथ-साथ नए आवेदन भी आमंत्रित किए जाएंगे ताकि पात्र शिक्षकों को अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए शासन से अतिरिक्त समय की मांग की गई है और समयसीमा बढ़ने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिक्षकों को अब कार्मिक विभाग और शासन के अगले निर्णय का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनुरोध आधारित तबादलों पर कब अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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